Friday, September 12, 2014
Sunday, August 24, 2014
Tuesday, August 12, 2014
नमन.....
शहीदों को एक दिन,
नमन पर्याप्त नही ,
न जाने कितने सुखदेव भगतसिंह ,
हँसते -हँसते फ़ांसी चढ़ गए ,
उनको एक दिन,
नमन पर्याप्त नही ,
कितनी मओ की कोख उजड़ गयी ,
कितनो के सिंदूर जो मिट गए ,
उनको एक दिन,
नमन पर्याप्त नही ,
अंतिम क्षण तक जो लड़े ,
रणभूमि जो शहीद हुए ,
नमन करो उन्हें हर दिन हर पल ,
उनको एक दिन, नमन पर्याप्त नही,
Sunday, August 10, 2014
रेशम का धागा
रेशम का धागा। ...................
यह कितना अजीब है ,
की एक रेशम का धागा ,
दिल के इतना करीब है ,
की एक रेशम का धागा ,
दिल के इतना करीब है ,
यह कितना अजीब है ,
दूर रहने वाले भी ,
दिल के करीब है ,
यह रेशम का बंधन ,
कितना अजीब है
शायद प्रेमरीत है,
इस रेशम के धागे में,
पिरोया हुआ प्रेम संगीत है
यह राखी कितनी अजीब है ,
ओह बहन का रूठ जाना ,
फिर मानकर,
विजय तिलक लगाना ,
एक रेशम से बध जाना ,
रेशम बंधन कितना अजीब है ,
Thursday, July 24, 2014
Saturday, July 12, 2014
काश
काश.…।
काश यह कलम तलवार होती ,
तो हम भी हाथ लाल कर लेते ,
कुर्बान कर देते ,
हिंसक सरो को ,
पत्थर से ह्यद को ,
मोम सा काट देते ,
खौफ़ के हैवान की ,
भुजाएं उखाड़ देते ,
हम भी हाथ लाल कर लेते।
इज्जत के भेडियो को ,
जड़ मूल से उखाड़ देते ,
खौफ़ के शहर से
खौफ़ को मिटा देते ,
काश यह कलम तलवार होती।
Friday, June 13, 2014
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