Sunday, November 27, 2016

वो चाँद मै जल रहा

वह चांद जल रहा है  हमें देख कर  कभी तुम्हें देख कर मुस्कुराता हुआ  वह चांद चल रहा है हमें देखकर  

Saturday, November 12, 2016

राधे

राधे राधे बोल ,
स्याम रंग रंगी राधे बोल
राधे राधे बोल
बोल बोल बोल
शयम की मीरा मीरा बोल
हम तेरे प्रेम पागल,
बोल बोल
हमको भी तू दास बना ले
प्रेम के रंग में मुझको भी
भीगा दे,
कह्ना कह्ना बोल
हम सब तेरे प्रेम के प्यासे
मधु की एक बूद हमे भी पिला दे
सवाल हमको भी अपना बना ले
सब है तेरे प्रेम में पागल
मुझको को भी
अपने रंग में रंगा ले
राधे राधे बोल
कह्ना कह्ना बोल

Sunday, November 6, 2016

मातृत्व


माँ मातृभाषा 

मातृभूमि से समझौता 

मै नहीं करता

भूखा रह लूँगा 

पर देश बेच कर 

पेट नहीं भरता


अश्रु बहा कर जी 

सकता है आशु

पर देश अपहित से

 मरना भला

यह संकल्प है मेरा

देश हित ही 

लक्ष्य है मेरा

लक्ष्य है मेरा

Monday, October 24, 2016

कैसी क्रन्ति

कैसी यह क्रांति
न जोश है न होश है
खुद खुद से लड़ रहा
हर सख्श बेहोश है,

ख़ुद को ख़ुदा समझता
अहम में जब गर्जता
न चित की चिंता
न चिंतन किसी का
कैसी यह क्रांति

न मान न सम्मान है
फ़सा हर इंसान है
स्वम्भू बनाने की चाह है
न जाने कौन सी राह है

बस आगे बढ़ना है
कन्धा किसी का हो
बस चढ़ना है
सोच में नहीं शान्ति
कैसी यह क्रांति

Thursday, October 6, 2016

आग़ोश

तेरी आग़ोश में
जहाँ दिखा
प्रेम की झलक
स्वप्नो की ललक दिखी

स्पर्श मात्र ही
रूह की सिहरन
को जगा गयी
कुछ अरमानों के
स्वप्न सार्थक हो गए

यह स्पर्शी प्रेम
तेरी आग़ोश में
रोम रोम में
अहसाह अपन्त्व का

Friday, September 9, 2016

जय काली

जय काली जय काली
चीते चार्म की साड़ी वाली
नर मुंडो की माला धारी
जय काली जय काली

स्वंण सा चेहरा
रक्त सी आँखे
केश घटा से
चरण चाँद से
जय काली जय काली

ममता की मूरत
माँ की सूरत
प्रेम की गंगा
माँ चामुण्डा
जय काली जय काली

हज़ारो सूर्यो का तेज लिए
हाथ में खप्पर ढाल लिए
मुख  से जिसने
शाहत्र्य गजो को
रोष में जिसने चबा लिया

न जाने कितने बाहुबलियों का
सर जड़ मूल से उखाड़ लिया
हजारो चक्रो को जिसने
मुख में अपने समा लिया

जय काली जय काली
प्रेम की मूरत ,
माँ काली को
जिसने अपना मान लिया
पुत्र बनाकर माँ उनका जीवन निखार दिया

Monday, July 11, 2016

मादा मच्छर

आज की नारी मादा मच्छर
सब पर भरी यह मादा मच्छर
पीती खून बिना यह जाने
प्यार से पुचकार के मारे
बटुवा खाली करके माने
फरमाइशों की बोली लगती
हमारी जेब बैंक है दिखती
सब पर भारी आज की नारी
भिखरी दशा यह कर दे
पूरा दिन तानो से भर दे
मादा मच्छर आज की नारी
खून भी पीती लात भी मारे,
फसे हुए है हम सब बेचारे , (आशु)